श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 166: सात्यकिके द्वारा भूरिका वध, घटोत्कच और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा भीमके साथ दुर्योधनका युद्ध एवं दुर्योधनका पलायन  »  श्लोक 64
 
 
श्लोक  7.166.64 
तत्रासीत् सुमहद् युद्धं द्रोणस्याथ परै: सह।
घोरे तमसि मग्नानां निघ्नतामितरेतरम्॥ ६४॥
 
 
अनुवाद
वहाँ द्रोणाचार्य अपने शत्रुओं के साथ घोर युद्ध कर रहे थे। सभी लोग घोर अंधकार में डूबे हुए थे और एक-दूसरे पर घातक अस्त्रों से प्रहार कर रहे थे।
 
There Dronacharya fought a huge battle with his enemies. Everyone was immersed in the pitch darkness and was attacking each other with deadly weapons.
 
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि घटोत्कचवधपर्वणि रात्रियुद्धे दुर्योधनापयाने षट्षष्टॺधिकशततमोऽध्याय:॥ १६६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत घटोत्कचवधपर्वमें रात्रियुद्धके प्रसंगमें दुर्योधनका पलायनविषयक एक सौ छाछठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १६६॥

 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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