|
| |
| |
श्लोक 7.166.64  |
तत्रासीत् सुमहद् युद्धं द्रोणस्याथ परै: सह।
घोरे तमसि मग्नानां निघ्नतामितरेतरम्॥ ६४॥ |
| |
| |
| अनुवाद |
| वहाँ द्रोणाचार्य अपने शत्रुओं के साथ घोर युद्ध कर रहे थे। सभी लोग घोर अंधकार में डूबे हुए थे और एक-दूसरे पर घातक अस्त्रों से प्रहार कर रहे थे। |
| |
| There Dronacharya fought a huge battle with his enemies. Everyone was immersed in the pitch darkness and was attacking each other with deadly weapons. |
| |
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि घटोत्कचवधपर्वणि रात्रियुद्धे दुर्योधनापयाने षट्षष्टॺधिकशततमोऽध्याय:॥ १६६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत घटोत्कचवधपर्वमें रात्रियुद्धके प्रसंगमें दुर्योधनका पलायनविषयक एक सौ छाछठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १६६॥
|
| |
| ✨ ai-generated |
| |
|