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श्लोक 7.166.2  |
अथैनं सात्यकि: क्रुद्ध: पञ्चभिर्निशितै: शरै:।
विव्याध हृदये तस्य प्रास्रवत् तस्य शोणितम्॥ २॥ |
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| अनुवाद |
| यह देखकर सात्यकि क्रोधित हो गए और उन्होंने भूरि की छाती में पाँच तीखे बाण मारे, जिससे रक्त की धारा बहने लगी॥2॥ |
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| Seeing this Satyaki became furious and he pierced Bhuri's chest with five sharp arrows. A stream of blood started flowing from it.॥2॥ |
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