श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 166: सात्यकिके द्वारा भूरिका वध, घटोत्कच और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा भीमके साथ दुर्योधनका युद्ध एवं दुर्योधनका पलायन  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  7.166.12 
स तु शक्त्या विभिन्नाङ्गो निपपात रथोत्तमात्।
लोहिताङ्ग इवाकाशाद् दीप्तरश्मिर्यदृच्छया॥ १२॥
 
 
अनुवाद
उस शक्ति के प्रभाव से भूरि के सारे अंग छिन्न-भिन्न हो गए और वह अपने उत्तम रथ से नीचे गिर पड़ा, मानो संयोगवश आकाश से कोई तेजस्वी किरणों वाला शुभ ग्रह गिर पड़ा हो।12.
 
Due to that power, all the limbs of Bhuri were torn apart and he fell down from his excellent chariot, as if by chance a auspicious planet with radiant rays had fallen from the sky. 12.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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