श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 164: दोनों सेनाओंका घमासान युद्ध और दुर्योधनका द्रोणाचार्यकी रक्षाके लिये सैनिकोंको आदेश  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.164.5 
उल्काशतै: प्रज्वलितै रणभूमिर्व्यराजत।
दह्यमानेव लोकानामभावे च वसुंधरा॥ ५॥
 
 
अनुवाद
सैकड़ों प्रज्वलित उल्काओं से युद्धभूमि ऐसी शोभायमान हो रही थी, मानो प्रलयकाल में सारी पृथ्वी जल रही हो॥5॥
 
The battlefield was looking so beautiful with hundreds of blazing meteors, as if the entire earth was burning during the time of doomsday. ॥ 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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