श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 164: दोनों सेनाओंका घमासान युद्ध और दुर्योधनका द्रोणाचार्यकी रक्षाके लिये सैनिकोंको आदेश  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  7.164.32 
तत: प्रववृते युद्धं रात्रौ भरतसत्तम।
उभयो: सेनयोर्घोरं परस्परजिगीषया॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
भरतसत्तम! तत्पश्चात् रात्रि के समय दोनों सेनाओं में एक-दूसरे पर विजय पाने की इच्छा से घोर युद्ध होने लगा॥32॥
 
Bharatsattam! Then, during the night, a fierce battle started between the two armies with the desire to conquer each other. 32॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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