श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 164: दोनों सेनाओंका घमासान युद्ध और दुर्योधनका द्रोणाचार्यकी रक्षाके लिये सैनिकोंको आदेश  »  श्लोक 10-11h
 
 
श्लोक  7.164.10-11h 
धृतराष्ट्र उवाच
तस्मिन् प्रविष्टे संरब्धे मम पुत्रस्य वाहिनीम्॥ १०॥
अमृष्यमाणे दुर्धर्षे कथमासीन्मनो हि व:।
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र ने पूछा - संजय! जब क्रोध और आक्रोश से भरे हुए महारथी अर्जुन मेरे पुत्र की सेना में घुसे, उस समय तुम्हारे मन की क्या स्थिति थी?
 
Dhritarashtra asked - Sanjay! When the fierce warrior Arjuna, filled with anger and resentment, entered my son's army, what was the state of your mind at that time?
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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