श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 163: कौरवों और पाण्डवोंकी सेनाओंमें प्रदीपों (मशालों)-का प्रकाश  »  श्लोक 34-35h
 
 
श्लोक  7.163.34-35h 
तद् देवगन्धर्वसमाकुलं च
यक्षासुरेन्द्राप्सरसां गणैश्च॥ ३४॥
हतैश्च शूरैर्दिवमारुहद्भि-
रायोधनं दिव्यकल्पं बभूव।
 
 
अनुवाद
देवताओं, गन्धर्वों, यक्षों, असुरों और अप्सराओं की भीड़ से भरा हुआ वह युद्धस्थल उन वीर योद्धाओं को स्वर्गलोक के समान प्रतीत हो रहा था, जो वहाँ मारे जाने पर स्वर्गलोक को चले गए॥34 1/2॥
 
That battle-field, filled with the multitudes of Gods, Gandharvas, Yakshas, ​​Asuras and Apsaras, appeared like a heavenly world to the valiant warriors who, after being killed there, ascended to heaven. ॥ 34 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)