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श्री महाभारत
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पर्व 7: द्रोण पर्व
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अध्याय 162: सात्यकिद्वारा सोमदत्तका वध, द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरका युद्ध तथा भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको द्रोणाचार्यसे दूर रहनेका आदेश
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श्लोक 32
श्लोक
7.162.32
स विमुक्तो बलवता शैनेयेन शरोत्तम:।
घोरस्तस्योरसि विभो निपपाताशु भारत॥ ३२॥
अनुवाद
हे भरतपुत्र! हे प्रभु! शिनिवंश के पराक्रमी सात्यकि द्वारा छोड़ा गया वह उत्तम एवं भयानक बाण तुरन्त ही सोमदत्त की छाती पर लग गया।
O son of Bharata! O Lord! That excellent and terrible arrow shot by the powerful Satyaki of the Shini dynasty soon fell on Somadatta's chest.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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