श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 162: सात्यकिद्वारा सोमदत्तका वध, द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरका युद्ध तथा भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको द्रोणाचार्यसे दूर रहनेका आदेश  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.162.2 
न ह्यहत्वा रणे शत्रुं सोमदत्तं महाबलम्।
निवर्तिष्ये रणात् सूत सत्यमेतद् वचो मम॥ २॥
 
 
अनुवाद
सूत! आज मैं अपने महाबली शत्रु सोमदत्त को मारे बिना युद्धभूमि से नहीं लौटूँगा। मैं जो कह रहा हूँ, वह सत्य है।॥2॥
 
Suta! Today I will not return from the battlefield without killing my mighty enemy Somadatta. What I am saying is true.'॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)