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mahabharat 7.16.52-53: इस प्रकार समस्त शत्रुओं को जीतकर अर्जुन श्रीकृष्ण के साथ समस्त सेनाओं को छोड़कर अत्यंत प्रसन्नतापूर्वक अपने शिविर में चले गए ॥52-53॥   |   mahabharat अध्याय 7.16: वृषसेनका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका तुमुल युद्ध, द्रोणाचार्यके द्वारा पाण्डवपक्षके अनेक वीरोंका वध तथा अर्जुनकी विजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 16: वृषसेनका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका तुमुल युद्ध, द्रोणाचार्यके द्वारा पाण्डवपक्षके अनेक वीरोंका वध तथा अर्जुनकी विजय  »  श्लोक 52-53
 
 
श्लोक  7.16.52-53 
एवं स्वशिबिरं प्रायाज्जित्वा शत्रून् धनंजय:॥ ५२॥
पृष्ठत: सर्वसैन्यानां मुदितो वै सकेशव:॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार समस्त शत्रुओं को जीतकर अर्जुन श्रीकृष्ण के साथ समस्त सेनाओं को छोड़कर अत्यंत प्रसन्नतापूर्वक अपने शिविर में चले गए ॥52-53॥
 
Having conquered all the enemies in this manner, Arjuna along with Sri Krishna went to his camp very happily leaving behind all the armies. ॥ 52-53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)