vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध
»
श्लोक 97
श्लोक
7.159.97
न तेऽस्त्रगोचरे शक्ता: स्थातुं देवा: सवासवा:।
किमु पार्था: सपाञ्चाला: सत्यमेतद् ब्रवीमि ते॥ ९७॥
अनुवाद
मैं तुमसे सत्य कहता हूँ कि इन्द्र आदि देवता भी तुम्हारे बाणों के मार्ग में नहीं टिक सकते; फिर कुन्तीपुत्र और पांचाल क्या कर सकते हैं?
I tell you the truth that even Indra and all the other gods cannot stand in the path of your arrows; then what can Kunti's sons and the Panchalas do?
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas