श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध  »  श्लोक 87
 
 
श्लोक  7.159.87 
मम वा मन्दभाग्यत्वान्मन्दस्ते विक्रमो युधि।
धर्मराजप्रियार्थं वा द्रौपद्या वा न विद्म तत्॥ ८७॥
 
 
अनुवाद
अथवा मेरे दुर्भाग्य से तुम्हारा युद्ध-बल क्षीण हो गया है। मैं नहीं जानता कि तुम यह धर्मराज युधिष्ठिर को प्रसन्न करने के लिए कर रहे हो या द्रौपदी को।
 
Or, due to my misfortune, your prowess in battle has diminished. I do not know whether you are doing this to please Dharmaraja Yudhishthira or Draupadi. ​​87
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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