श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध  »  श्लोक 86
 
 
श्लोक  7.159.86 
दुर्योधन उवाच
आचार्य: पाण्डुपुत्रान् वै पुत्रवत् परिरक्षति।
त्वमप्युपेक्षां कुरुषे तेषु नित्यं द्विजोत्तम॥ ८६॥
 
 
अनुवाद
दुर्योधन ने कहा- द्विजश्रेष्ठ! हमारे आचार्य पाण्डवों की रक्षा अपने पुत्र के समान करते हैं और आप भी सदैव उनकी उपेक्षा करते हैं॥86॥
 
Duryodhana said – Dwijashreshtha! Our Acharya protects the Pandavas like his own son and you also always ignore them. 86॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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