श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध  »  श्लोक 85
 
 
श्लोक  7.159.85 
न हि ते सम्भ्रम: कार्य: पार्थस्य विजयं प्रति।
अहमावारयिष्यामि पार्थं तिष्ठ सुयोधन॥ ८५॥
 
 
अनुवाद
सुयोधन! अर्जुन पर विजय के विषय में तुम्हें कोई संदेह नहीं होना चाहिए। तुम स्थिर रहो। मैं अर्जुन को रोकूँगा। 85॥
 
Suyodhan! You should not have any doubts regarding victory over Arjuna. You stand still. I will stop Arjun. 85॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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