श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध  »  श्लोक 77
 
 
श्लोक  7.159.77 
एष राजा महाबाहुरमर्षी क्रोधमूर्च्छित:।
पतङ्गवृत्तिमास्थाय फाल्गुनं योद्‍धुमिच्छति॥ ७७॥
 
 
अनुवाद
महाबाहु राजा दुर्योधन क्रोध में अपनी चेतना खो बैठा है और पतंगबाजी का व्यवसाय अपनाकर अर्जुन से युद्ध करना चाहता है।
 
The infuriating, mighty-armed King Duryodhana has lost his senses in anger and has taken the profession of kites and wants to fight with Arjuna.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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