श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध  »  श्लोक 73
 
 
श्लोक  7.159.73 
जेष्याम्यद्य रणे पार्थं सायकैर्नतपर्वभि:।
तिष्ठध्वं समरे शूरा भयं त्यजत फाल्गुनात्॥ ७३॥
 
 
अनुवाद
आज मैं युद्धभूमि में अपने मुड़े हुए बाणों द्वारा अर्जुन को परास्त करूँगा। हे वीर योद्धाओं! युद्धभूमि में दृढ़ रहो और अर्जुन का भय त्याग दो॥73॥
 
‘Today I shall defeat Arjuna on the battlefield with my arrows having bent knots. O brave warriors! Stay firm on the battlefield and leave the fear of Arjuna.॥ 73॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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