श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध  »  श्लोक 72
 
 
श्लोक  7.159.72 
अद्य बाणमयं वर्षं सृजतो मम धन्विन:।
जीमूतस्येव घर्मान्ते द्रक्ष्यन्ति युधि सैनिका:॥ ७२॥
 
 
अनुवाद
जैसे वर्षा ऋतु में बादल जल बरसाते हैं, उसी प्रकार आज युद्धभूमि में सभी सैनिक मेरे द्वारा धनुष लेकर की गई बाणों की वर्षा देखेंगे॥ 72॥
 
Just as the clouds shower water during the rainy season, similarly all the soldiers on the battlefield today will see the shower of arrows done by me with my bow in hand.॥ 72॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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