श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  7.159.71 
अद्य मद्‍बाणजालानि विमुक्तानि सहस्रश:।
द्रक्ष्यन्ति समरे योधा: शलभानामिवायती:॥ ७१॥
 
 
अनुवाद
आज युद्धभूमि में हजारों योद्धा मेरे द्वारा छोड़े गए हजारों बाणों को पतंगों की पंक्तियों के समान देखेंगे।
 
‘Today, thousands of warriors in the battle field will see the thousands of arrows shot by me like rows of moths.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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