श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध  »  श्लोक 50-51h
 
 
श्लोक  7.159.50-51h 
स तु तं सहसा प्राप्तं नित्यमत्यन्तवैरिणम्॥ ५०॥
कर्णो वैकर्तन: सूत किमुत्तरमपद्यत।
 
 
अनुवाद
संजय! उस समय अपने चिर शत्रु अर्जुन को सामने देखकर सूर्यपुत्र कर्ण ने किस प्रकार उसे उत्तर देने का निश्चय किया? ॥50 1/2॥
 
Sanjay! At that time, seeing his eternal enemy Arjun in front of him, how did the son of Sun, Karna decide to answer him? ॥ 50 1/2 ॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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