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श्री महाभारत
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पर्व 7: द्रोण पर्व
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अध्याय 159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध
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श्लोक 44
श्लोक
7.159.44
दृष्ट्वैतां निर्जितां सेनां रणे कर्णेन धीमता।
अभियात्येष बीभत्सु: सूतपुत्रजिघांसया॥ ४४॥
अनुवाद
बुद्धिमान कर्ण द्वारा रणभूमि में इस सेना को पराजित होते देख यह अर्जुन सूतपुत्र को मारने की इच्छा से आगे बढ़ रहा है ॥44॥
Seeing this army defeated in the battlefield by the wise Karna, this Arjuna is moving forward with the desire to kill Sutaputra. 44॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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