श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध  »  श्लोक 42-43
 
 
श्लोक  7.159.42-43 
युध्यतेऽसौ रणे कर्णो दंशित: सर्वपार्थिवै:॥ ४२॥
पश्यैतां द्रवतीं सेनां कर्णसायकपीडिताम्।
कार्तिकेयेन विध्वस्तामासुरीं पृतनामिव॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
युद्धभूमि में कवचधारी कर्ण अकेला ही समस्त राजाओं के विरुद्ध युद्ध कर रहा है। देखो, कर्ण के बाणों से पीड़ित यह पाण्डव सेना कार्तिकेय द्वारा नष्ट की गई राक्षस सेना के समान भाग रही है।
 
On the battlefield, that armor-clad Karna is fighting alone against all the kings. Look, this Pandava army, afflicted by Karna's arrows, is fleeing like the demon army destroyed by Kartikeya. 42-43.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)