श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  7.159.35 
तत्राद्भुतमपश्याम सूतपुत्रस्य लाघवम्।
यदेनं सर्वतो यत्ता नाप्नुवन्ति परे युधि॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
वहाँ हमने सारथीपुत्र कर्ण की अद्भुत चपलता देखी, जिसके कारण सब ओर से प्रयत्न करने पर भी शत्रु योद्धा उस रणभूमि में कर्ण पर विजय प्राप्त नहीं कर सके।
 
There we witnessed the astonishing agility of Karna, the son of a charioteer, due to which, in spite of trying from all sides, the enemy warriors were not able to overpower Karna on that battlefield.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas