श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  7.159.17 
तत: कृपोऽप्युवाचेदमाचार्य: सुमहामना:।
सौम्यस्वभावाद् राजेन्द्र क्षिप्रमागतमार्दव:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
राजेन्द्र! तत्पश्चात् अपने सौम्य स्वभाव के कारण महामना कृपाचार्य भी शान्त हो गये और इस प्रकार बोले॥17॥
 
Rajendra! After that, due to his gentle nature, Mahamana Kripacharya also became calm and spoke like this. 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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