श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  7.159.16 
संजय उवाच
प्रसाद्यमानस्तु ततो राज्ञा द्रौणिर्महामना:।
प्रससाद महाराज क्रोधवेगसमन्वित:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - महाराज! राजा दुर्योधन के समझाने पर क्रोध में भरे हुए महाबुद्धिमान अश्वत्थामा शान्त और प्रसन्न हो गये।
 
Sanjaya says - Maharaj! On being persuaded by King Duryodhana, the great-minded Ashwatthama who was filled with anger became calm and happy. 16.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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