श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  7.159.12 
अश्वत्थामोवाच
तवैतत् क्षम्यतेऽस्माभि: सूतात्मज सुदुर्मते।
दर्पमुत्सिक्तमेतत् ते फाल्गुनो नाशयिष्यति॥ १२॥
 
 
अनुवाद
अश्वत्थामा ने कहा - मूर्ख सूतपुत्र ! हम तुम्हारा यह अपराध क्षमा करते हैं । अर्जुन तुम्हारे इस बढ़े हुए गर्व को नष्ट कर देंगे ॥12॥
 
Ashwatthama said – Foolish son of Suta! We forgive this crime of yours. Arjun will destroy this inflated pride of yours. 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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