vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध
»
श्लोक 12
श्लोक
7.159.12
अश्वत्थामोवाच
तवैतत् क्षम्यतेऽस्माभि: सूतात्मज सुदुर्मते।
दर्पमुत्सिक्तमेतत् ते फाल्गुनो नाशयिष्यति॥ १२॥
अनुवाद
अश्वत्थामा ने कहा - मूर्ख सूतपुत्र ! हम तुम्हारा यह अपराध क्षमा करते हैं । अर्जुन तुम्हारे इस बढ़े हुए गर्व को नष्ट कर देंगे ॥12॥
Ashwatthama said – Foolish son of Suta! We forgive this crime of yours. Arjun will destroy this inflated pride of yours. 12॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas