श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.159.11 
कर्ण उवाच
शूरोऽयं समरश्लाघी दुर्मतिश्च द्विजाधम:।
आसादयतु मद्वीर्यं मुञ्चेमं कुरुसत्तम॥ ११॥
 
 
अनुवाद
कर्ण ने कहा, "कुरुश्रेष्ठ! यह मूर्ख और नीच ब्राह्मण स्वयं को महान योद्धा और अपने युद्ध कौशल के लिए प्रसिद्ध बताता है। आप इसे छोड़ दीजिए। आज इसका सामना मेरे पराक्रम से होगा।"
 
Karna said - Best of the Kurus! This foolish and lowly Brahmin pretends to be a great warrior and is famous for his war skills. You should let him go. Today he will face my prowess.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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