श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 159: अश्वत्थामाका कर्णको मारनेके लिये उद्यत होना, दुर्योधनका उसे मनाना, पाण्डवों और पाञ्चालोंका कर्णपर आक्रमण, कर्णका पराक्रम, अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय तथा दुर्योधनका अश्वत्थामासे पांचालोंके वधके लिये अनुरोध  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.159.1 
संजय उवाच
तथा परुषितं दृष्ट्वा सूतपुत्रेण मातुलम्।
खड्गमुद्यम्य वेगेन द्रौणिरभ्यपतद् द्रुतम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - हे राजन! सारथिपुत्र कर्ण को अपने मामा के प्रति कटु वचन बोलते देख अश्वत्थामा ने तुरंत ही तलवार उठाकर बड़े जोर से कर्ण पर आक्रमण किया।
 
Sanjaya says - O King! Seeing Karna, the son of a charioteer, speaking harsh words to his maternal uncle, Ashvatthama immediately attacked Karna with great force, raising his sword.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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