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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 157: सोमदत्तकी मूर्च्छा, भीमके द्वारा बाह्लीकका वध, धृतराष्ट्रके दस पुत्रों और शकुनिके सात रथियों एवं पाँच भाइयोंका संहार तथा द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरके युद्धमें युधिष्ठिरकी विजय  »  श्लोक 6-7
 
 
श्लोक  7.157.6-7 
सोमदत्तोऽपि तं वीरं शतेन प्रत्यविध्यत।
सात्वतस्त्वभिसंक्रुद्ध: पुत्राधिभिरभिप्लुतम्॥ ६॥
वृद्धं वृद्धगुणैर्युक्तं ययातिमिव नाहुषम्।
विव्याध दशभिस्तीक्ष्णै: शरैर्वज्रनिपातनै:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
सोमदत्त ने भी वीर भीमसेन को सौ बाणों से घायल करके बदला लिया। इधर, सात्यकि भी अत्यन्त क्रोधित होकर पुत्र शोक में डूब गए। नहुषनंदन ययातिकि के समान उन्होंने वज्र को भी मार डालने में समर्थ दस तीक्ष्ण बाणों से वृद्ध सोमदत्त को घायल कर दिया।
 
Somdutt also took revenge by piercing the brave Bhimsen with a hundred arrows. Here, Satyaki also got very angry and was immersed in grief for his son. Like Nahushanandan Yayatiki, he pierced old Somdutta with ten sharp arrows capable of killing even a thunderbolt. 6-7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)