|
| |
| |
श्लोक 7.157.49  |
द्रोणेन वार्यमाणास्ते स्वयं तव सुतेन च।
नाशक्यन्त महाराज योधा वारयितुं तदा॥ ४९॥ |
| |
| |
| अनुवाद |
| महाराज! द्रोणाचार्य और आपके अपने पुत्र दुर्योधन के मना करने पर भी उस समय आपके योद्धाओं को रोका नहीं जा सका। |
| |
| Maharaj! Despite the refusal of Dronacharya and your own son Duryodhana, your warriors could not be stopped at that time. 49. |
| |
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि घटोत्कचवधपर्वणि रात्रियुद्धे द्रोणयुधिष्ठिरयुद्धे सप्तपञ्चाशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १५७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत घटोत्कचवधपर्वमें रात्रियुद्धके प्रसंगमें द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरका युद्धविषयक एक सौ सत्तावनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १५७॥
|
| |
| ✨ ai-generated |
| |
|