श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 157: सोमदत्तकी मूर्च्छा, भीमके द्वारा बाह्लीकका वध, धृतराष्ट्रके दस पुत्रों और शकुनिके सात रथियों एवं पाँच भाइयोंका संहार तथा द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरके युद्धमें युधिष्ठिरकी विजय  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  7.157.40 
ततो नाज्ञासिषं किंचिद् घोरेण तमसाऽऽवृते।
सर्वभूतानि च परं त्रासं जग्मुर्महीपते॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! उस समय घोर अंधकार से युक्त उस रणभूमि में मैं कुछ भी नहीं देख सका और समस्त प्राणी अत्यन्त भयभीत हो गए॥40॥
 
O King! Then I could not make out anything in that battlefield which was engulfed in deep darkness and all beings became very frightened. ॥ 40॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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