Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.157.34-35h: उस अस्त्र के नष्ट हो जाने पर द्रोणाचार्य ने युधिष्ठिर पर क्रमशः वरुण, यम, आग्नेय, त्वष्ट्र और सवित्र नामक दिव्यास्त्र चलाए; क्योंकि वे अत्यन्त क्रोधित होकर पाण्डु नन्दन युधिष्ठिर को मार डालना चाहते थे ॥34 1/2॥ | mahabharat अध्याय 7.157: सोमदत्तकी मूर्च्छा, भीमके द्वारा बाह्लीकका वध, धृतराष्ट्रके दस पुत्रों और शकुनिके सात रथियों एवं पाँच भाइयोंका संहार तथा द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरके युद्धमें युधिष्ठिरकी विजय । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उस अस्त्र के नष्ट हो जाने पर द्रोणाचार्य ने युधिष्ठिर पर क्रमशः वरुण, यम, आग्नेय, त्वष्ट्र और सवित्र नामक दिव्यास्त्र चलाए; क्योंकि वे अत्यन्त क्रोधित होकर पाण्डु नन्दन युधिष्ठिर को मार डालना चाहते थे ॥34 1/2॥
After that weapon was destroyed, Dronacharya fired divine weapons named Varun, Yamya, Aagneya, Tvashtra and Savitra respectively on Yudhishthir; Because they were very angry and wanted to kill Pandu Nandan Yudhishthira. 34 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥