| श्री महाभारत » पर्व 7: द्रोण पर्व » अध्याय 157: सोमदत्तकी मूर्च्छा, भीमके द्वारा बाह्लीकका वध, धृतराष्ट्रके दस पुत्रों और शकुनिके सात रथियों एवं पाँच भाइयोंका संहार तथा द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरके युद्धमें युधिष्ठिरकी विजय » श्लोक 31 |
|
| | | | श्लोक 7.157.31  | हताहरत गृह्णीत विध्यत व्यवकृन्तत।
इत्यासीत् तुमुल: शब्दो युधिष्ठिररथं प्रति॥ ३१॥ | | | | | | अनुवाद | | युधिष्ठिर के रथ के चारों ओर 'उसे मार डालो, उसे ले आओ, उसे पकड़ लो, उसे घायल कर दो, उसके टुकड़े-टुकड़े कर दो' जैसी भयंकर ध्वनियाँ गूँजने लगीं ॥31॥ | | | | Terrible sounds such as "Kill him, bring him, capture him, wound him, tear him into pieces" began to echo around Yudhishthira's chariot. ॥ 31॥ | | ✨ ai-generated | | |
|
|