श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 157: सोमदत्तकी मूर्च्छा, भीमके द्वारा बाह्लीकका वध, धृतराष्ट्रके दस पुत्रों और शकुनिके सात रथियों एवं पाँच भाइयोंका संहार तथा द्रोणाचार्य और युधिष्ठिरके युद्धमें युधिष्ठिरकी विजय  »  श्लोक 1-2
 
 
श्लोक  7.157.1-2 
संजय उवाच
द्रुपदस्यात्मजान् दृष्ट्वा कुन्तिभोजसुतांस्तथा।
द्रोणपुत्रेण निहतान् राक्षसांश्च सहस्रश:॥ १॥
युधिष्ठिरो भीमसेनो धृष्टद्युम्नश्च पार्षत:।
युयुधानश्च संयत्ता युद्धायैव मनो दधु:॥ २॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं- राजन! द्रोणपुत्र अश्वत्थामा द्वारा द्रुपद और कुन्तिभोज के पुत्रों तथा हजारों राक्षसों को मारे जाते देखकर युधिष्ठिर, भीमसेन, द्रुपद के पुत्र धृष्टद्युम्न और युयुधान भी सतर्क हो गये और युद्ध पर ध्यान केंद्रित करने लगे। 1-2॥
 
Sanjay says- Rajan! Seeing Drupada and Kuntibhoja's sons and thousands of demons killed by Drona's son Ashwatthama, Yudhishthir, Bhimsen, Drupada's son Dhrishtadyumna and Yuyudhana also became alert and concentrated on fighting. 1-2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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