Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.156.96-97h: द्रोणकुमार! क्या मैं युद्धस्थल के नीच लोगों के समान कायर हूँ, जो तुम मुझे अपने वचनों से भयभीत कर रहे हो? तुम्हारा यह कथन नीच है॥96 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 96-97h
 
 
श्लोक  7.156.96-97h 
किमहं कातरो द्रौणे पृथग्जन इवाहवे॥ ९६॥
यन्मां भीषयसे वाग्भिरसदेतद् वचस्तव।
 
 
अनुवाद
द्रोणकुमार! क्या मैं युद्धस्थल के नीच लोगों के समान कायर हूँ, जो तुम मुझे अपने वचनों से भयभीत कर रहे हो? तुम्हारा यह कथन नीच है॥96 1/2॥
 
‘Dronakumar! Am I as cowardly as the mean people on the battlefield, that you are frightening me with your words? This statement of yours is mean.॥ 96 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)