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mahabharat 7.156.92-93h: घटोत्कच ने कहा, "द्रोणपुत्र! चुपचाप खड़े रहो। आज तुम मेरे हाथों से जीवित नहीं बच पाओगे। जिस प्रकार अग्निपुत्र कार्तिकेय ने क्रौंच पर्वत को भेद दिया था, उसी प्रकार मैं आज तुम्हारा सर्वनाश कर दूँगा।"   |   mahabharat अध्याय 7.156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 92-93h
 
 
श्लोक  7.156.92-93h 
घटोत्कच उवाच
तिष्ठ तिष्ठ न मे जीवन् द्रोणपुत्र गमिष्यसि॥ ९२॥
त्वामद्य निहनिष्यामि क्रौञ्चमग्निसुतो यथा।
 
 
अनुवाद
घटोत्कच ने कहा, "द्रोणपुत्र! चुपचाप खड़े रहो। आज तुम मेरे हाथों से जीवित नहीं बच पाओगे। जिस प्रकार अग्निपुत्र कार्तिकेय ने क्रौंच पर्वत को भेद दिया था, उसी प्रकार मैं आज तुम्हारा सर्वनाश कर दूँगा।"
 
Ghatotkacha said, "Son of Drona, stand still. You will not be able to escape alive from my hands today. Just as Agniputra Kartikeya had pierced the Krauncha mountain, I will destroy you today."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)