श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 85-86h
 
 
श्लोक  7.156.85-86h 
गदा हेमाङ्गदा राजंस्तूर्णं हैडिम्बिसूनुना॥ ८५॥
भ्राम्योत्क्षिप्ता शरै: साऽपि द्रौणिनाभ्याहताऽपतत्।
 
 
अनुवाद
राजन! तब घटोत्कच के पुत्र ने तुरन्त ही अपनी सोने के अंगारों से सुसज्जित गदा घुमाकर अश्वत्थामा पर प्रहार किया; किन्तु अश्वत्थामा के बाणों से आहत होकर वह भी पृथ्वी पर गिर पड़ी॥85 1/2॥
 
Rajan! Then Ghatotkach's son immediately swung his mace decorated with gold embers and hit Ashwatthama; But after being hurt by the arrows of Ashwatthama, she also fell on the earth. 85 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)