Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.156.84-85h: तत्पश्चात् उन्होंने रथहीन राक्षसपुत्र के हाथ में रखी हुई सुवर्ण-नुकीली तलवार को एक तीक्ष्ण बाण से मारकर दो टुकड़े कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 84-85h
 
 
श्लोक  7.156.84-85h 
विरथस्योद्यतं हस्ताद्धेमबिन्दुभिराचितम्॥ ८४॥
विशिखेन सुतीक्ष्णेन खड्गमस्य द्विधाकरोत्।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उन्होंने रथहीन राक्षसपुत्र के हाथ में रखी हुई सुवर्ण-नुकीली तलवार को एक तीक्ष्ण बाण से मारकर दो टुकड़े कर दिया।
 
Thereafter, he struck the golden-pointed sword held in the hand of the Rakshasa's son, who was left without a chariot, with a sharp arrow and broke it into two pieces. 84 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)