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mahabharat 7.156.48-49h: अर्जुन को द्रोणाचार्य का सामना करने के लिए जाते देख भीमसेन ने भी अपने सारथि से कहा, 'मुझे द्रोणाचार्य की सेना की ओर ले चलो।'   |   mahabharat अध्याय 7.156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 48-49h
 
 
श्लोक  7.156.48-49h 
भीमसेनोऽपि तं दृष्ट्वा यान्तं द्रोणाय फाल्गुनम्॥ ४८॥
स्वसारथिमुवाचेदं द्रोणानीकाय मा वह।
 
 
अनुवाद
अर्जुन को द्रोणाचार्य का सामना करने के लिए जाते देख भीमसेन ने भी अपने सारथि से कहा, 'मुझे द्रोणाचार्य की सेना की ओर ले चलो।'
 
Seeing Arjuna going to face Dronacharya, Bhimasena also said to his charioteer, 'Take me towards Dronacharya's army.' 48 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)