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mahabharat 7.156.47-48h: तब दशरथ कुलनन्दन श्रीकृष्ण ने चाँदी, गौदुग्ध, कमलपुष्प और चन्द्रमा के समान श्वेत कांति वाले घोड़ों को द्रोणाचार्य के रथ की ओर हाँक दिया। 47 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 47-48h
 
 
श्लोक  7.156.47-48h 
ततो रजतगोक्षीरकुन्देन्दुसदृशप्रभान्॥ ४७॥
चोदयामास दाशार्हो हयान् द्रोणरथं प्रति।
 
 
अनुवाद
तब दशरथ कुलनन्दन श्रीकृष्ण ने चाँदी, गौदुग्ध, कमलपुष्प और चन्द्रमा के समान श्वेत कांति वाले घोड़ों को द्रोणाचार्य के रथ की ओर हाँक दिया। 47 1/2॥
 
Then Dasharha Kulanandan Shri Krishna drove the horses having silver, cow milk, lotus flower and white radiance like the moon towards Dronacharya's chariot. 47 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)