vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय
»
श्लोक 45-46h
श्लोक
7.156.45-46h
एवं सा पाण्डवी सेना वध्यमाना महात्मना॥ ४५॥
प्रदुद्राव पुनर्भीता पश्यत: सव्यसाचिन:।
अनुवाद
इस प्रकार महाबली द्रोणाचार्य के द्वारा मारी गई पाण्डव सेना पुनः भयभीत हो गई और सव्यसाची अर्जुन के सामने से भागने लगी।
Thus the Pandava army, being killed by the great Drona, became frightened once again and started fleeing in front of Savyasachi Arjuna. 45 1/2
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×