श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 33-34h
 
 
श्लोक  7.156.33-34h 
तत: सायकजालेन पाण्डवानीकमावृणोत्॥ ३३॥
भारद्वाजो महातेजा विव्याध च युधिष्ठिरम्।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् पराक्रमी द्रोणाचार्य ने अपने बाणों के समूह से पाण्डव सेना को आच्छादित कर दिया और युधिष्ठिर को घायल कर दिया ॥33 1/2॥
 
Thereafter, the mighty Dronacharya covered the Pandava army with his mass of arrows and pierced Yudhishthira. 33 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)