Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.156.17-18: जिनमें दान, संयम, पवित्रता, अहिंसा, शील, धैर्य और क्षमा आदि गुण सदैव अविनाशी रूप से विद्यमान रहते हैं, जो अपनी ध्वजा पर डमरू का चिह्न धारण करते थे, उन्हीं राजा युधिष्ठिर के तेज से तुम पहले ही मर चुके हो। अतः इस युद्धभूमि में कर्ण और शकुनि सहित तुम्हारा भी नाश हो जाएगा॥ 17-18॥ | mahabharat अध्याय 7.156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जिनमें दान, संयम, पवित्रता, अहिंसा, शील, धैर्य और क्षमा आदि गुण सदैव अविनाशी रूप से विद्यमान रहते हैं, जो अपनी ध्वजा पर डमरू का चिह्न धारण करते थे, उन्हीं राजा युधिष्ठिर के तेज से तुम पहले ही मर चुके हो। अतः इस युद्धभूमि में कर्ण और शकुनि सहित तुम्हारा भी नाश हो जाएगा॥ 17-18॥
You have already died due to the brilliance of that very king Yudhishthira in whom charity, self-control, purity, non-violence, modesty, patience and forgiveness etc. always exist in an indestructible manner. Who wore the symbol of a drum on his flag. Therefore, you will be destroyed in this battlefield along with Karna and Shakuni.॥ 17-18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥