Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.156.155-156h: शत्रुओं का संहार करने वाला घटोत्कच सुन्दर ध्वजाओं से सुसज्जित तथा भयंकर रथ की तरह चमकते हुए रथ पर सवार होकर द्रोणपुत्र के साथ पुनः द्वन्द्वयुद्ध करने गया। | mahabharat अध्याय 7.156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स ययौ घोररूपेण सुपताकेन भास्वता॥ १५५॥
द्वैरथं द्रोणपुत्रेण पुनरप्यरिसूदन:।
अनुवाद
शत्रुओं का संहार करने वाला घटोत्कच सुन्दर ध्वजाओं से सुसज्जित तथा भयंकर रथ की तरह चमकते हुए रथ पर सवार होकर द्रोणपुत्र के साथ पुनः द्वन्द्वयुद्ध करने गया।
Ghatotkacha, the slayer of enemies, went once again to fight the duel with Drona's son in a chariot decorated with beautiful flags and shining with a fearsome chariot.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥