दुर्योधन उवाच
न त्वेतदद्भुतं मन्ये यत् ते महदिदं मन:।
अस्मासु च परा भक्तिस्तव गौतमिनन्दन॥ ११८॥
अनुवाद
दुर्योधन ने कहा- हे गौतमीपुत्र! तुम्हारा हृदय इतना विशाल है कि मुझे इसमें कोई आश्चर्य नहीं लगता कि तुमने ऐसा किया। हम लोगों के प्रति तुम्हारा स्नेह बहुत अधिक है ॥118॥
Duryodhan said- O son of Gautami! Your heart is so big that I do not consider it surprising that you have done this. Your affection for us is very high. ॥ 118॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥