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mahabharat 7.156.100: ऐसा कहकर महाबली राक्षस घटोत्कच ने क्रोध से लाल आंखें करके द्रोणपुत्र पर इस प्रकार आक्रमण किया, मानो सिंह ने हाथियों के राजा पर आक्रमण किया हो।   |   mahabharat अध्याय 7.156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 100
 
 
श्लोक  7.156.100 
इत्युक्त्वा क्रोधताम्राक्षो राक्षस: सुमहाबल:।
द्रौणिमभ्यद्रवत् क्रुद्धो गजेन्द्रमिव केसरी॥ १००॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर महाबली राक्षस घटोत्कच ने क्रोध से लाल आंखें करके द्रोणपुत्र पर इस प्रकार आक्रमण किया, मानो सिंह ने हाथियों के राजा पर आक्रमण किया हो।
 
Saying this, the mighty demon Ghatotkacha, his eyes turning red with anger, attacked Drona's son with a rage, as if a lion had attacked a king of elephants.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)