श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 153: कौरव-पाण्डव-सेनाका युद्ध, दुर्योधन और युधिष्ठिरका संग्राम तथा दुर्योधनकी पराजय  »  श्लोक d1
 
 
श्लोक  7.153.d1 
(धृतराष्ट्र उवाच
द्रोण: कर्ण: कृपश्चैव कृतवर्मा च सात्वत:।
नावारयन् कथं युद्धे राजानं राजकाङ्क्षिण:॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र ने पूछा - द्रोण, कर्ण, कृपा और सात्वतवंशी कृतवर्मा - ये राजा के प्रशंसकों में से हैं, उन्होंने उन्हें युद्ध में जाने से क्यों नहीं रोका?
 
Dhritarashtra asked - Drona, Karna, Kripa and Kritavarma of Satvatavanshi - these are among the king's fans, why did they not stop him from going to war?
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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