(धृतराष्ट्र उवाच
द्रोण: कर्ण: कृपश्चैव कृतवर्मा च सात्वत:।
नावारयन् कथं युद्धे राजानं राजकाङ्क्षिण:॥
अनुवाद
धृतराष्ट्र ने पूछा - द्रोण, कर्ण, कृपा और सात्वतवंशी कृतवर्मा - ये राजा के प्रशंसकों में से हैं, उन्होंने उन्हें युद्ध में जाने से क्यों नहीं रोका?
Dhritarashtra asked - Drona, Karna, Kripa and Kritavarma of Satvatavanshi - these are among the king's fans, why did they not stop him from going to war?