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श्लोक 7.153.44  |
ततो राजन् महानासीत् संग्रामो भूरिवर्धन:।
तावकानां परेषां च समेतानां युयुत्सया॥ ४४॥ |
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| अनुवाद |
| हे राजन! तत्पश्चात् आपके सैनिकों और युद्ध की इच्छा से एकत्रित हुए शत्रु सैनिकों में महान् युद्ध आरम्भ हो गया। इस युद्ध में बहुत से लोग मारे गए॥44॥ |
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| O King! Thereafter a great battle began between your soldiers and the enemy's soldiers who had gathered with the desire to fight. In this battle a large number of people were killed. ॥ 44॥ |
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इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि घटोत्कचवधपर्वणि रात्रियुद्धे दुर्योधनपराभवे त्रिपञ्चाशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १५३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत घटोत्कचवधपर्वमें रात्रिकालिक युद्धके प्रसंगमें दुर्योधनपराजयविषयक एक सौ तिरपनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १५३॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ७ श्लोक मिलाकर कुल ५१ श्लोक हैं।) |
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