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mahabharat 7.153.42-43: यह देखकर विजय के लिए उत्सुक पांचाल सैनिक तुरन्त ही उसका सामना करने के लिए आगे बढ़े; परंतु कौरवों में श्रेष्ठ दुर्योधन की रक्षा के लिए द्रोणाचार्य ने उन सबको उसी प्रकार नष्ट कर दिया जैसे सूर्यदेव तेज वायु द्वारा उठे हुए बादलों को नष्ट कर देते हैं ॥42-43॥   |   mahabharat अध्याय 7.153: कौरव-पाण्डव-सेनाका युद्ध, दुर्योधन और युधिष्ठिरका संग्राम तथा दुर्योधनकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 153: कौरव-पाण्डव-सेनाका युद्ध, दुर्योधन और युधिष्ठिरका संग्राम तथा दुर्योधनकी पराजय  »  श्लोक 42-43
 
 
श्लोक  7.153.42-43 
प्रत्युद्ययुस्तं त्वरिता: पञ्चाला जयगृद्धिन:॥ ४२॥
तान् द्रोण: प्रतिजग्राह परीप्सन् कुरुसत्तमम्।
चण्डवातोद्‍धुतान् मेघान् निघ्नन् रश्मिमुचो यथा॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
यह देखकर विजय के लिए उत्सुक पांचाल सैनिक तुरन्त ही उसका सामना करने के लिए आगे बढ़े; परंतु कौरवों में श्रेष्ठ दुर्योधन की रक्षा के लिए द्रोणाचार्य ने उन सबको उसी प्रकार नष्ट कर दिया जैसे सूर्यदेव तेज वायु द्वारा उठे हुए बादलों को नष्ट कर देते हैं ॥42-43॥
 
Seeing this, the Panchala soldiers, eager for victory, immediately advanced to face him; but to protect the best of the Kurus, Duryodhana, Dronacharya destroyed them all in the same way as the Sun God destroys the clouds raised by the strong wind. ॥ 42-43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)