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mahabharat 7.153.41-42h: कुछ ही देर बाद द्रोणाचार्य युद्धभूमि में प्रकट हुए। राजा दुर्योधन ने हर्ष और उत्साह से भरकर अपना प्रबल धनुष हाथ में लिया और 'खड़े रहो, खड़े रहो' कहते हुए पाण्डुपुत्र राजा युधिष्ठिर पर आक्रमण किया।   |   mahabharat अध्याय 7.153: कौरव-पाण्डव-सेनाका युद्ध, दुर्योधन और युधिष्ठिरका संग्राम तथा दुर्योधनकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 153: कौरव-पाण्डव-सेनाका युद्ध, दुर्योधन और युधिष्ठिरका संग्राम तथा दुर्योधनकी पराजय  »  श्लोक 41-42h
 
 
श्लोक  7.153.41-42h 
अथ द्रोणो द्रुतं तत्र प्रत्यदृश्यत संयुगे।
हृष्टो दुर्योधनश्चापि दृढमादाय कार्मुकम्॥ ४१॥
तिष्ठ तिष्ठेति राजानं ब्रुवन् पाण्डवमभ्ययात्।
 
 
अनुवाद
कुछ ही देर बाद द्रोणाचार्य युद्धभूमि में प्रकट हुए। राजा दुर्योधन ने हर्ष और उत्साह से भरकर अपना प्रबल धनुष हाथ में लिया और 'खड़े रहो, खड़े रहो' कहते हुए पाण्डुपुत्र राजा युधिष्ठिर पर आक्रमण किया।
 
Soon after that, Dronacharya was seen on the battlefield. King Duryodhana, filled with joy and enthusiasm, took his strong bow in his hand and attacked King Yudhishthira, son of Pandu, saying, 'Stand, stand'.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)