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mahabharat 7.153.34-35h: हे महाराज! ज्येष्ठ पाण्डव युधिष्ठिर ने शत्रुओं का संहार करने में तत्पर दुर्योधन के सुवर्णमय विशाल धनुष को दो ही वारों से तीन टुकड़े कर दिया। 34 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.153: कौरव-पाण्डव-सेनाका युद्ध, दुर्योधन और युधिष्ठिरका संग्राम तथा दुर्योधनकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 153: कौरव-पाण्डव-सेनाका युद्ध, दुर्योधन और युधिष्ठिरका संग्राम तथा दुर्योधनकी पराजय  »  श्लोक 34-35h
 
 
श्लोक  7.153.34-35h 
तस्य तान् निघ्नत: शत्रून् रुक्मपृष्ठं महद् धनु:॥ ३४॥
भल्लाभ्यां पाण्डवो ज्येष्ठस्त्रिधा चिच्छेद मारिष।
 
 
अनुवाद
हे महाराज! ज्येष्ठ पाण्डव युधिष्ठिर ने शत्रुओं का संहार करने में तत्पर दुर्योधन के सुवर्णमय विशाल धनुष को दो ही वारों से तीन टुकड़े कर दिया। 34 1/2॥
 
Honorable King! Yudhishthira, the eldest Pandava, with two blows, broke into three pieces the golden-edged huge bow of Duryodhana, who was engaged in killing the enemies. 34 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)